GSEB Std 12 Hindi Textbook Solutions Chapter 4 अकेली
Gujarat Board GSEB Std 12 Hindi Textbook Solutions Chapter 4 अकेली Textbook Exercise Important Questions and Answers, Notes Pdf.
GSEB Std 12 Hindi Textbook Solutions Chapter 4 अकेली
GSEB Std 12 Hindi Digest अकेली Textbook Questions and Answers
स्वाध्याय
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दिए गए विकल्पों में से चुनकर लिखिए ।
प्रश्न 1.
‘अकेली’ कहानी की लेखिका का क्या नाम है?
(क) सोमा बुआ
(ख) मनू भण्डारी
(ग) मृदुला गर्ग
(घ) कृष्णा सोबती
उत्तर :
(ख) मनू भण्डारी
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प्रश्न 2.
सोमा बुआ का पति क्यों तीरथवासी हुआ?
(क) परिवार की नफरत से
(ख) धर्म के लगाव से
(ग) पुत्र की मृत्यु से दुखी होकर
(घ) बेकारी से
उत्तर :
(ग) पुत्र की मृत्यु से दुखी होकर
प्रश्न 3.
सोमा बुआ की पड़ोसन का नाम क्या था?
(क) राधा
(ख) रोहिणी
(ग) रूपा
(घ) रश्मि
उत्तर :
(क) राधा
प्रश्न 4.
सोमाबुआ के मृत पुत्र की एक मात्र निशानी क्या थी?
(क) कलम-कापी
(ख) संदूक
(ग) मकान
(घ) अंगुठी
उत्तर :
(घ) अंगुठी
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए :
प्रश्न 1.
‘अकेली’ कहानी का प्रमुख पात्र कौन है?
उत्तर :
अकेली कहानी का प्रमुख पात्र सोमा बुआ हैं।
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प्रश्न 2.
सोमा बुआ को अपनी जिन्दगी किसके भरोसे काटनी पड़ती थी?
उत्तर :
सोमा बुआ को अपनी जिंदगी पास-पड़ोसवालों के भरोसे काटनी पड़ती थी।
प्रश्न 3.
सोमा बुआ के बेटे का नाम क्या था?
उत्तर :
सोमा बुआ के बेटे का नाम हरखू था।
प्रश्न 4.
सोमा बुआ को किसके ब्याह का न्यौत नहीं मिला?
उत्तर :
सोमा बुआ को अपने समधियाने की किसी लड़की के ब्याह का न्यौता नहीं मिला।
प्रश्न 5.
सोमा बुआ की छोटी-सी डिबिया में कितने रुपए थे?
उत्तर :
सोमा बुआ की छोटी-सी डिबिया में सात रुपए थे।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-तीन वाक्यों में लिखिए :
प्रश्न 1.
सोमा बुआ पिछले बीस साल से कैसा जीवन जीती थी?
उत्तर :
सोमा बुआ का जवान बेटा जाता रहा, तो पति पुत्र वियोग में घर-बार छोड़कर तीरथवासी हो गए। घर में कोई और था नहीं। इस तरह पिछले बीस साल से सोमा बुआ अकेली रहती थीं और एकाकीपन का जीवन जी रही थी।
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प्रश्न 2.
सोमा बुआ पड़ोसवालों के घर कैसे प्रसंग पर पहुंच जाती थीं? वहाँ क्या करती थीं ?
उत्तर :
सोमा बुआ पड़ोसवालों के घर मुंडन, छठी, जनेऊ अथवा शादी या गमी के अवसर पर पहुँच जाया करती थीं। वहाँ पहुंचकर वे छाती फाड़कर काम करती थीं। उन्हें काम करते देखकर ऐसा लगता था जैसे वे दूसरे के घर में नहीं, अपने ही घर में काम कर रही हों।
प्रश्न 3.
सोमा बुआ के पति का व्यवहार कैसा था?
उत्तर :
सोमा बुआ के पति संन्यासी थे। वे हरिद्वार में रहते थे और साल में एक महीने के लिए उनके पास आकर रहते थे। वे एक स्नेहहीन व्यक्ति थे। उनके आने से सोमा बुआ का रोजमर्रा का क्रम गड़बड़ा जाता था। सोमा बुआ का घूमना-फिरना और दूसरों से मिलनाजुलना उन्हें बिलकुल पसंद नहीं था। उन्हें किसी के यहाँ किसी कार्यक्रम में बिना बलाए जाना भी पसंद नहीं था। वे सोमा बुआ से कभी मीठे बोल तक नहीं बोलते थे। जब तक वे रहते थे सोमा बुआ का चेहरा मुरझाया रहता था। सोमा बुआ के पति उन पर क्रोध भरी वाणी और कटुवचनों की बौछार करने से नहीं चूकते।
प्रश्न 4.
सोमा बुआ ने अंगूठी क्यों बेच दी?
उत्तर :
सोमा बुआ अपने रिश्तेदारों से बहुत लगाव रखती थीं। उनके दिवंगत देवर की ससुराल की किसी लड़की की शादी उनके गाँव में होनेवाली थी। सोमा बुआ का मानना था कि देवर के मरने के बाद भले उनसे संबंध न रहा हो, पर लड़कीवाले समधी ठहरे, इसलिए लड़की को कुछ देना उनका फर्ज है। घर में पैसे थे नहीं। यह अंगूठी उनके मृत बेटे की निशानी थी। उन्होंने यह अंगूठी बेचकर लड़की को उपहार देना तय किया। इसलिए सोमा बुआ ने अंगूठी बेंच दी।
4. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर पाँच-छ में दीजिए :
प्रश्न 1.
सोमा बुआ की पारिवारिक समस्या क्या थी?
उत्तर :
सोमा बुआ के परिवार में वे और उनके संन्यासी पति हैं। सोमा बुआ का एक बेटा था, जिसकी मृत्यु जवानी में ही हो गई थी। उनके पति को बेटे की मृत्यु का ऐसा सदमा पहुँचा कि वे सोमा बुआ और घर-बार छोड़कर संन्यासी हो गए और हरिद्वार जाकर रहने लगे। पिछले बीस वर्ष से सोमा बुआ एकाकी जीवन बिता रही है। एक कोठरी के मामूली किराए में बस दो समय की रोटी निकल जाती है। संन्यासी पति साल में एक महीने के लिए घर आते हैं। वे एकदम रूखे स्वभाव के व्यक्ति हैं।
वे सोमा बुआ के प्रति स्नेह नहीं रखते। पति-पत्नी में अक्सर कहा-सुनी होती रहती है। उनके आने पर सोमा बुआ का पासपड़ोस में जाना और किसी से मिलना-जुलना बंद हो जाता है। बुआ पति से दो मोठे बोल को तरस जाती है। संन्यासीजी को बिना बुलाए सोमा बुआ का किसी के घर जाना या पड़ोस के किसी कार्यक्रम में शामिल होना पसंद नहीं है। इस प्रकार सोमा बुआ की पारिवारिक समस्या उनके जीवन का अकेलापन और उनके पति का रूखा व्यवहार है।
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प्रश्न 2.
सोमा बुआ ने सम्बंधी के वहाँ ब्याह में जाने के लिए क्या-क्या तैयारियाँ की थी?
उत्तर :
सोमा बुआ के स्वर्गीय देवर की ससुराल की किसी लड़की की शादी सोमा बुआ के गांव में ही होनेवाली थी। रिश्ते में सोमा बुआ के पति ससुरालवालों के समधी लगते थे, पर उन्हें इस रिश्ते में कोई रुचि नहीं थी। परंत सोमा बआ रिश्ता निभाए रखना चाहती थीं। वे लड़की को उपहार देने में भी पीछे नहीं रहना चाहती थीं। परंतु उनके पास अच्छा उपहार देने के लिए पैसे नहीं थे। मुश्किल से सात रुपए और एक अंगूठी थी, जो उनके मृत पुत्र की एकमात्र निशानी थी।
सोमा बुआ ने वह अंगूठी और पाँच रुपए पड़ोसन राधा को देकर उससे चांदी की सिंदूरदानी, एक साड़ी और ब्लाउज का कपड़ा मंगवाया। उन्होंने चूड़ीवाले से हरी-लाल चूड़ियाँ खरीदकर पहन लीं। एक आने का पीला रंग लेकर रात में उन्होंने अपनी साड़ी भी रंगवा ली थी। उन्होंने उपहार की सारी सामग्री – साड़ी, सिंदूरदानी, नारियल और थोड़े से बताशे एक थाली में सजाकर रखी। – इस प्रकार सोमा बुआ ने समधी के यहाँ ब्याह में जाने के लिए पूरी तैयारी की।
5. आशय स्पष्ट कीजिए :
प्रश्न 1.
अपने ही काम नहीं आयेंगे तो कोई बाहर से तो आवेगा नहीं?
उत्तर :
हमारे देश में होके मौके एक-दूसरे को सहयोग देने की पुरानी परंपरा रही है। एक-दूसरे के सहयोग से काम कम समय में आसानी से हो जाता है। खुशी अथवा गमी के समय पास-पड़ोस के लोग अकसर सहयोग देने के लिए तैयार रहते हैं। दूर के लोगों से सहयोग की गुंजाइश कम ही रहती है। आदमी अपनों से ही सहयोग की उम्मीद करता है। वे ही मौके पर काम आते हैं। बाहरवालों से सहयोग की उम्मीद नहीं की जा सकती।
प्रश्न 2.
एक काम गत से नहीं हो रहा था। अब घर में कोई बड़ा-बूढ़ा हो तो बतावे, या कभी किया हो। तो जानें।
उत्तर :
कोई काम ढंग से तभी होता है, जब काम करनेवाले व्यक्ति को उस काम को करने की जानकारी हो अथवा उसने काम शुरू करने से पहले किसी बड़े-बूढ़े व्यक्ति से उस काम के बारे में जानकारी प्राप्त कर ली हो। किसी काम के बारे में समुचित जानकारी न होने पर सारा काम बिगड़ जाता है। विशेष अवसरों पर सही ढंग से काम न होने पर भह उड़ते देर नहीं लगती।
6. निम्नलिखित कथनों की पूर्ति के लिए दिए गए विकल्पों में से उचित विकल्प चुनकर वाक्य पूर्ण कीजिए :
प्रश्न 1.
बुआ ने बड़े-बड़े आर्थिक संकटों के समय ……..मोह नहीं छोड़ा था ।
(क) मृत पुत्र की एक मात्र निशानी अंगूठी का
(ख) अपने पति के साथ तीर्थों में रहने का
(ग) रिश्तेदारों के यहाँ समारोहों में जाने का
(घ) अच्छा खाने-पीने का
उत्तर :
बुआ ने बड़े-बड़े आर्थिक संकटों के समय मृत पुत्र की एकमात्र निशानी अंगूठी का मोह नहीं छोड़ा था।
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प्रश्न 2.
गली में चूड़ीनाते की आमान गुराबर की दृष्टि ………जाकर टिनः गयी।
(क) अपने हाथ की सुनहरी चूड़ियों पर
(ख) अपने हाथ की चमकीली चूड़ियों पर
(ग) अपने हाथ की नीली-हरी चूड़ियों पर
(घ) अपने हाथ की भद्दी मटमैली चूड़ियों पर
उत्तर :
गली में चूड़ीवाले की आवाज सुनी तो उनकी दृष्टि अपने हाथ की भही मटमैली चड़ियों पर जाकर टिक गई।
प्रश्न 3.
राधा भाभी ने समधियों के यहाँ विवाह में देने के लिए बुआ को बाजार से क्या लाकर दिया?
(क) चाँदी के बर्तन, कुछ कपड़े तथा सोने की अंगूठी
(ख) चाँदी की एक सिन्दूरदानी, एक लाड़ी तथा ब्लाउज का कपड़ा
(ग) कुछ आभूषण और साड़ियाँ
(घ) चाँदी की पाजेब और ओढ़नी
उत्तर :
राधा भाभी ने समधियों के यहां विवाह में देने के लिए बुआ को चांदी की एक सिंदूरदानी, एक साड़ी तथा ब्लाउज का कपड़ा बाजार से लाकर दिया।
GSEB Solutions Class 12 Hindi अकेली Important Questions and Answers
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सविस्तार (पाँच-छ: वाक्यों में) लिखिए :
प्रश्न 1.
सोमा बुआ का चरित्र लिखिए।
उत्तर :
सोमा बुआ बड़ी जीवंत महिला हैं। जवान पुत्र की मृत्यु के सदमें से पति घर-बार छोड़कर संन्यासी हो गए, पर सोमा बुआ ने किसी तरह वह दुःख झेल लिया। बीस वर्ष से वह अकेलेपन का मानसिक कष्ट भोग रही हैं। अकेलेपन की इस असहनीय पीड़ा को ये आसपास रहनेवाले लोगों की खुशी अथवा गमी के आयोजनों में बिना बुलाए प्रेमपूर्वक शामिल हो जाती हैं।
केवल शामिल ही नहीं होती, इस प्रकार जी-तोड़ मेहनत करती हैं जैसे वह उन्हीं के घर का आयोजन हो। कई बार तो सोमा बुआ की कुशलता के कारण ही पड़ोसियों के घर होनेवाले आयोजन सफल होते हैं और आयोजकों की भद्द होने से बच जाती है। आयोजक उनका आभार मानते हैं और सोमा बुआ को भी अपनी प्रशंसा अच्छी लगती है। दूर के रिश्तेदारों से भी संबंध बनाए रखने में सोमा बुआ का हौसला देखते ही बनता है। परंतु रिश्तेदारों की बेरुखी उनके हौसले को पस्त कर देती है। सचमुच सोमा बुआ एक दयनीय पात्र है।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए:
प्रश्न 1.
सोमा बुआ के पति क्या करते थे?
उत्तर :
सोमा बुआ के पति संन्यासी थे।
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व्याकरण
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची (समानार्थी) शब्द लिखिए।
- सदमा = आघात
- एकरसता = एकाकीपन
- व्यवधान = रुकावट
- परिवर्तन = बदलाव
- अंकुश = दबाव, नियंत्रण
- अबाध = बेराक-टोक
- स्वच्छंद = मुक्त
- सम्बल = सहारा
- शिथिल = ढीला, मंद
- सजीव = जानदार
- सक्रिय = क्रियाशील
- गरूर = अभिमान
- बिरादरी = भाईचारा
- आक्रोश = कटुता
- आश्वासन = दिलासा
- पुलकित = प्रसन्न
- रौनक = जलसा
- हंगामा = शोर
- मिन्नत = विनती
- अव्यक्त = अप्रकट
- लाज = शर्म
- आब = चमक
- सिमटना = सिकुडना
- पुट = हलका मेल या मिलावट
- अंगीठी = सिगड़ी
निम्नलिखित शब्दों के विलोम (विरुद्धार्थी) शब्द लिखिए :
- बुढ़िया × युवती
- वियोग × संयोग
- अपना × पराया
- सजीव × निर्जीव
- सक्रिय × निष्क्रिय
- नई × पुरानी
- लेना × देना
- अंत × आरंभ
- बहोरना × बिखराना
- नाराज × राजी
- कोमल × कठोर
- प्रगति × रुकावट
- रौनक × बेरौनक
- विधवा × सधवा
- उत्साह × निरुत्साह
- रईस × निर्धन
- मत × जीवित
- शिथिल × तीव
- भद्दी × सुंदर
- प्रशंसा × निंदा
- गम × खुशी
- जवानी × बुढ़ापा
- विश्वास × अविश्वास
- बावली × समझदार
- धूप × छाँव, छाया
- संयत × असंयत
- उपकार × अपकार
निम्नलिखित तदभव शब्दों के तत्सम रूप लिखिए :
- आसरा – आश्रय
- न्यौता – निमंत्रण
- आंसू – अश्रु
- धरम-करम – धर्म-कर्म
- ठंडी – शीतल
- वरस – वर्ष
- जतन – यत्न
निम्नलिखित शब्दों में से प्रत्यय अलग कीजिए :
- एकाकीपन = एकाकी + पन (प्रत्यय)
- स्वाभाविक = स्वभाव + इक (प्रत्यय)
निम्नलिखित शब्दों में से उपसर्ग अलग कीजिए :
- परित्यक्ता = परि (उपसर्ग) + त्यक्ता
- प्रतीक्षा = प्रति (उपसर्ग) + इक्षा
- वियोग = वि (उपसर्ग) + योग
- सजीव = स (उपसर्ग) + जीव
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निम्नलिखित वाक्यों में से विशेषण पहचानिए :
प्रश्न 1.
- देवरजी को मरे पच्चीस बरस हो गए।
- ठंडी साँस उनके दिल से निकल गई।
- सोमा बुआ अकेली रहती थी।
उत्तर :
- पच्चीस – संख्यावाचक विशेषण
- ठंडी – गुणवाचक विशेषण
- अकेली – गणवाचक विशेषण
निम्नलिखित शब्दसमूहों के लिए एक-एक शब्द लिखिए :
- पति ने जिसे त्याग दिया है – परित्यक्ता
- सदा एक रूप (ढंग) में रहना – एकरसता
- कहना और सुनना – कहा-सुनी
- घर के भीतर का (खुला भाग) – आँगन
- जिसमें जीव हो – सजीव
- भोज में एकसाथ खानेवालों की पति – पंगत
- घर में अन्न आदि रखने का स्थान – भंडार
- कड़वे बोल – कटुवचन
- जो किसी रिश्ते से जुड़े हों – रिश्तेदार
- सात दिन की अवधि – सप्ताह
- पति का छोटा भाई – देवर
- पति पत्नी के पिता – समधी
- जिसका पत्ति जीवित न हो – विधवा
- पति की बहन – ननद
- शृंगार की चीजें रखने की पेटी – शृंगारदान
- इकन्नी-दुअन्नी आदि के सिक्के – रेजगारी
- मिट्टी की तरह मैली – मटमैली
- साड़ी का सामनेवाला छोर – आंचल
- जो व्यक्त न हुआ – अव्यक्त
- जोर का कम होना – कमजोरी
- सबसे मेल-जोल रखना – मिलनसारिता
- सिंदूर रखने की डिबिया – सिंदूरदानी
- धुला हआ कपड़ा कड़ा करने के लिए मांड लगाना – कलैक
- मेज पर बिछाया जानेवाला कपड़ा – मेजपोश
- नासमझ महिला – बावली
- कार्य करने का शुभ समय – मुहूर्त
निम्नलिखित अशुद्ध वाक्यों को शुद्ध करके फिर से लिखिए :
प्रश्न 1.
- तुमने लाज रख लिया।
- उनका आंसू फिर बह चला।
- कहना-सुनना तो चलती ही रहती है।
- मेरे को तो सबसे निभानी पड़ता है।
- राधा भाभी मन-ही-मन मुस्करा उठी।
- वे तुम से बुलाए बिगर नहीं मानेंगे।
- उनका नजर अंगूठी पर गया।
उत्तर :
- तुमने लाज रख ली।
- उनके आंसू फिर वह चले।
- कहना-सुनना तो चलता ही रहता है। या कहा-सूनी तो चलती रहती है।
- मुझे तो सबसे निभाना पड़ता है।
- राधा भाभी मन-ही-मन मुस्करा उठीं।
- वे तुमको बुलाए बिना नहीं मानेंगे।
- उनकी नजर अंगूठी पर गई।
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निम्नलिखित मुहावरों के अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग कीजिए :
आंखें बिछाना – स्नेह या आदरपूर्वक स्वागत करना
वाक्य : घर पर माँ अपने बच्चे के स्कूल से लौटने के लिए आंखें बिछाए बैठी रहती है।
जस मनाना – उपकार मानना
वाक्य : परीक्षा के समय विद्यार्थियों की अच्छी तैयारी कराने के लिए अभिभावक हिंदी शिक्षक का जस मानते हैं।
भद्द उड़ना – बदनामी होना
वाक्य : लड़की की शादी में बरातियों के लिए मिठाइयाँ कम पड़ जाने के कारण लड़कीवालों की भह उड़ गई।
लाज रखना – लज्जित होने से बचाना
वाक्य : सेठजी ने अपने माल्ली द्वारा साहूकार से लिए गए ऋण के पैसे चुकता करके उसकी लाज रख ली।
टांग अड़ाना – किसी के कार्य में बाधक बनना
वाक्य : कुछ लोगों को दूसरों के मामले में टांग अड़ाने की आदत होती है।
मीठे बोल बोलना – प्यार से बातें करना
वाक्य : नेताजी मीठे बोल बोलकर जनता के दिल जीत लेते हैं।
पल्ला पकड़ना – सहारा पाने के लिए किसी को पकड़ना
वाक्य : मनीष ने उस भले आदमी का पल्ला पकड़ लिया, इसलिए उसकी जिंदगी मौज से बीत गई।
सिर के बल जाना- नम्रतापूर्वक जाना
वाक्य : अफसर की घंटी सुनकर सेवक सिर के बल पहुंच जाते हैं।
दिल धड़कना – चिंता या भय से व्याकुल होना
वाक्य : सेठजी को किसी ने फोन पर धमकाया तो उनका दिल धड़कने लगा।
अकेली Summary in Hindi
विषय-प्रवेश :
मनुष्य के जीवन में अकेलापन बहुत दुःखदायी और असहनीय होता है। प्रस्तुत कहानी में अकेलेपन का मानसिक कष्ट भोग रही एक महिला का हृदयस्पर्शी वर्णन किया गया है। वह महिला अपना अकेलापन दूर करने के लिए अपने पड़ोसियों और अपने आसपास रहनेवाले लोगों की खुशी अथवा गमी के आयोजनों में बिना बुलाए प्रेमपूर्वक शामिल हो जाती है और इस प्रकार जीतोड़ मेहनत करती है, मानो उसी का आयोजन हो। एक बार तो उसने अपने एक पुराने रिश्तेदार की एक लड़की की शादी में शामिल होने और कन्या को उपहार देने के लिए अपने मृत पुत्र की एकमात्र निशानी अंगूठी बेच दी थी, पर उसे न्यौता तक नहीं मिला।
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पाठ का सार :
सोमा बुआ का परिवार : सोमा बुआ के परिवार में वे और उनके संन्यासी पति हैं। सोमा बुआ का एक बेटा था, जिसकी जवानी में मृत्यु हो गई थी। उनके पति को बेटे की मृत्यु का ऐसा सदमा लगा कि वे सोमा बुआ और घर-बार दोनों का त्याग कर संन्यासी बन गए। अब सोमा बुआ बीस वर्ष से एकाकी जीवन जी रही हैं।
जिंदगी पास-पड़ोसवालों के भरोसे : सोमा बुआ अपनी जिंदगी आस-पास के लोगों से हिल-मिलकर जैसे-तैसे काट रही हैं। किसी के घर मुंडन, छठी, जनेऊ, शादी, गमीं कुछ भी हो, वे बिना बुलाए पहुंच जाती हैं। जी-जान से वहाँ काम में जुट जाती हैं, मानो दूसरे के घर में नहीं अपने घर में ही काम कर रही हों।
किशोरीलाल के बेटे के मुंडन में : सोमा बुआ बताती हैं कि किशोरीलाल के बेटे के मुंडन में उन्होंने उनका कितना काम संभाला था। किशोरीलाल बोले, “अम्मा! तुम न होती तो आज भह उड़ जाती। तुमने लाज रख ली।” क्या बताऊँ वहाँ गीतवाली औरतें मुंडन पर बन्ना-बनी गा रही थीं। समोसे कच्चे ही उतार दिए गए थे और जरूरत से ज्यादा बना दिए थे। गुलाबजामुन इतने कम थे कि एक पंगत में भी पूरे न पड़ते। उसी समय खोया मंगाकर नए गुलाबजामुन बनवाए। इस पर भी संन्यासी महाराज नाराज हो गए – “किशोरी के यहाँ से बुलावा नहीं आया था, तो क्यों गई?” सोमा बुआ ने उन्हें सुना दिया – “घरवालों का कैसा बुलावा।”
सोमा बुआ के संन्यासी पति : सोमा बुआ के संन्यासी पति ग्यारह महीने हरिद्वार में रहते हैं। उन्हें दीन-दुनिया, रिश्तों-नातों से कुछ लेना-देना नहीं है। वे हर साल एक महीने के लिए अपनी पत्नी सोमा बुआ के पास आकर रहते हैं।
सोमा बुआ के साथ संन्यासीजी का व्यवहार : महीने भर के लिए आने पर अकसर सोमा बुआ के साथ उनकी कहा-सुनी होती है। वे सोमा बुआ से कोई स्नेह नहीं रखते। उनके आने पर सोमा बुआ का पास-पड़ोस में घूमना और किसी से मिलना-जुलना बंद हो जाता है। बुआ दो मीठे बोल को तरस जाती हैं। संन्यासीजी को सोमा बुआ का बिना बुलाए किसी के भी किसी कार्यक्रम में जाना बिलकुल पसंद नहीं है।
देवर के ससुरालवालों की लड़की की शादी : एक दिन बुआ प्रसन्न मन से संन्यासीजी से कहती है कि देवरजी की ससुराल की किसी लड़की की शादी उनके गांव में हो रही है। वे लोग यहीं आकर शादी करेंगे। वे कहती हैं देवरजी को तो मरे अरसा हो गया है, पर हैं तो वे लोग समधी ही। वे तुम्हें भी बुलाए बिना नहीं रहेंगे। संन्यासीजी सोमा बुआ की बात सुन लेते हैं, पर जवाब कुछ नहीं देते।
राधा से सलाह : सोमा बुआ पड़ोसन राधा से सलाह करती है कि नए फैशन में लड़की को क्या दिया जाए! फिर वे राधा पर ही छोड़ देती हैं कि जो उसे ठीक लगे लड़की को उपहार में देने लायक चीज खरीदकर ला दे।
पैसों की कमी : सोमा बुआ राधा को पैसे देने के लिए अपना बक्सा खोलती हैं। उसमें केवल सात रुपए मिलते हैं। उनकी नजर उस अंगूठी पर जाती है, जो उनके मृत पुत्र की एकमात्र निशानी थी। उन्होंने पाँच रुपए और वह अंगूठी अपने आँचल में बाँध लिया। उन्होंने अंगूठी राधा को देकर कहा, “ये अंगूठी ले और इसे बेचकर लड़की को देने लायक जो लगे खरीद ला।”
नई चूड़ियाँ : शादी में जाने के लिए अपनी भी कुछ तैयारी करनी थी। सोमा बुआ ने चुडिहार से एक रुपए की हरी-लाल चूड़ियाँ अपने हाथों में पहन ली।
उपहार का सामान : राधा अंगूठी बेचकर चाँदी की सिंदूरदानी, एक साड़ी तथा ब्लाउज का एक कपड़ा लाकर सोमा बुआ को देती है। बुआ की खुशी का ठिकाना नहीं रहता। देखकर बुआ का अंगूठी बेचने का गम जाता रहा।
बुलाने का समय : राधा सोमा बुआ से शादी में जाने के समय के बारे में पूछती है। बुआ जवाब देती हैं कि नए फैशनवालों की बात हैं। ऐन मौके पर बुलावा आता है। वैसे पांच बजे का मुहूर्त है। बुआ ने एक थाली में साड़ी, सिंदूरदानी, नारियल और थोड़े से बताशे सजाकर राधा को दिखाया।
संन्यासी महाराज की चेतावनी : संन्यासी महाराज सुबह से बुआ का यह आयोजन देख रहे थे। उन्होंने कल से आजतक पच्चीस बार चेतावनी दे दी थी कि यदि कोई बुलाने न आया और तुम चली गई तो ठीक नहीं होगा। बुआ ने भी उन्हें आश्वस्त किया कि बिना बुलाए वे नहीं जाएंगी।
बुलाने की प्रतीक्षा : तीन बजे के करीब बुआ छत पर पहुंचकर अनमने भाव से घूमने लगीं। वे छत से गली में नजर फैलाए इस तरह खड़ी रहौं, जैसे वे बुलावे की प्रतीक्षा कर रही हों …
सात बजे : राधा को सात बजे छत पर धुंधलके में एक छाया गली की ओर मुंह किए हुए बेचैन-सी दिखाई दी। उसने पूछा, “बुआ आज खाना नहीं बनेगा क्या? सात बज गए।” बुआ बोली, “खाने का क्या है। दो जनों का क्या खाना, क्या पकाना।”
सारी चीजें संदूक में : सोमा बुआ निराश होकर छत से नीचे आ गई। उन्होंने अपने हाथ की चूड़ियाँ निकाली और थाली में सजाई हुई सारी चीजें जतन से संभालकर अपने संदूक में रख दिया। फिर बुझे दिल से वे अंगीठी जलाने बैठ गईं।
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अकेली शब्दार्थ :
- परित्यक्ता – छोड़ी हुई, त्याग दी गई।
- जाता रहा – (यहाँ) मर गया।
- वियोग – अलग होने का दुःख।
- सदमा – किसी घटना का आघात।
- एकरसता – हमेशा एक जैसा रहना।
- व्यवधान – बाधा।
- प्रतीक्षा – इंतजार।
- अंकुश – रोक, दबाव।
- अबाध – बिना रोक-टोक।
- कुंठित – धीमा, कुन्द।
- सम्बल – सहारा।
- कहासुनी – वाद-विवाद।
- अवयव – अंग।
- सक्रिय – क्रियाशील।
- सुहाता – अच्छा लगता।
- नवेली – नई ब्याही हुई।
- गत से – तेजी से, ढंग से।
- बन्ना-बन्नी – दूल्हा-दुल्हन।
- आक्रोश – रोष, क्रोध।
- पंगत – एकसाथ भोजन करनेवालों की पंक्ति ।
- जस – यश।
- उपेक्षा – उदासीनता।
- रौनक – चमक-दमक।
- बेमरद – जिसका पति उसके साथ न हो।
- मिन्नत – विनती।
- मटमैली – मिट्टी के रंग की, गंदी।
- अव्यक्त – जिसका वर्णन न किया जा सके।
- पुलकित – गदगद।
- मिलनसरिता – अच्छी तरह मिलने-जुलने का गुण।
- आब – आभा, चमक-दमक।
- बावली – पगली, मूर्ख।
- अभरक – एक धातु, जिसकी तहें चमकीली होती हैं।
- संयत – मर्यादित।
- बुझा दिल – उत्साह मंद पड़ना।