GSEB Std 11 Hindi Textbook Solutions Chapter 2 बापू की कुटिया में
Gujarat Board GSEB Hindi Textbook Std 11 Solutions Chapter 2 बापू की कुटिया में Textbook Exercise Important Questions and Answers, Notes Pdf.
GSEB Std 11 Hindi Textbook Solutions Chapter 2 बापू की कुटिया में
GSEB Std 11 Hindi Digest बापू की कुटिया में Textbook Questions and Answers
स्वाध्याय
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दिए गए विकल्पों में से चुनकर लिखिए :
प्रश्न 1.
लेखक कहाँ बैठा है ?
(क) सिरहाने
(ख) पायतानें
(ग) बीच में
(घ) नीचे
उत्तर :
(ख) पायतानें
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प्रश्न 2.
शैल्फ के ऊपर रखा पत्थर का टुकड़ा कैसा है ?
(क) चिकना
(ख) मुलायम
(ग) खुरदरा
(घ) ऊबड़-खाबड़
उत्तर :
(घ) ऊबड़-खाबड़
प्रश्न 3.
चिकने पत्थर के टुकड़े पर क्या लिखा है ?
(क) प्रेम ही भगवान है।
(ख) हे राम!
(ग) सत्य-अहिंसा
(घ) ईश्वर एक है।
उत्तर :
(क) प्रेम ही भगवान है।
प्रश्न 4.
बापू की कुटिया के कितने भाग हैं. ?
(क) दो
(ख) तीन
(ग) पाँच
(घ) चार
उत्तर :
(ख) तीन
2. एक-एक वाक्य में उत्तर दीजिए:
प्रश्न 1.
लेखक ने विश्ववंद्य व्यक्ति किसे कहा है ?
उत्तर :
लेखक ने गांधीजी को विश्ववंद्य व्यक्ति कहा है।
प्रश्न 2.
बापू का बिस्तरा किन वस्तुओं से निर्मित था ?
उत्तर :
बापू का बिस्तरा खजूर की चटाई, एक गद्दा और खादी से निर्मित था।
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प्रश्न 3.
हिन्दुत्त्व के नाम पर किसने अनर्थ किया ?
उत्तर :
हिन्दुत्व के नाम पर बापू के हत्यारे नाथूराम गोड़से ने अनर्थ किया।
प्रश्न 4.
अंतिम दिनों में बापू की सेवा कौन करता था ?
उत्तर :
अंतिम दिनों में बापू की सेवा राजकुमारी अमृत कौर करती थीं।
प्रश्न 5.
थक जाने पर बापू किसके सहारे बैठते थे ?
उत्तर :
थक जाने पर बापू एक बड़े तकिये के सहारे बैठते थे।
3. दो-तीन वाक्यों में उत्तर दीजिए :
प्रश्न 1.
लेखक अपने आप को दुर्भागी क्यों समझते हैं ?
उत्तर :
लेखक बापू के आदेश पर स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े थे। पढ़ाई छोड़कर अपना पूरा जीवन देश की आज़ादी के प्रति समर्पित कर दिया था। इसके लिए कई बार उन्हें संकटों का सामना करना पड़ा। बापू के प्रति उनके मन में अपार श्रद्धा थी. पर बापू के जीवनकाल में वे उनके आवास पर पहुंचकर उनके दर्शन न कर सके। लेखक इसके लिए अपने आप को दुर्भागी समझते हैं।
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प्रश्न 2.
लेखक ने गांधीजी के बिस्तरे को गौरवशाली क्यों कहा हैं ?
उत्तर :
लेखक के अनुसार यों तो गांधीजी का बिस्तरा खजूर की चटाई पर एक गद्दा डालकर और उसे खादी से ढककर बनाया गया था, पर इस सादगी में भी वह महान है। वह बड़े-बड़े रत्नजड़ित सिंहासनों से भी बड़ा सिंहासन है। क्योंकि उस बिस्तर को अपने ऊपर उस बड़े आदमी, उस महापुरुष को दिनों, महीनों, वर्षों आसीन कराने का गौरव प्राप्त हुआ है, जिसके दर्शन को लोग तरसते थे। इसलिए लेखक ने गांधीजी के बिस्तरे को गौरवशाली कहा है।
प्रश्न 3.
गांधीजी के शैल्फ में कौन-कौन सी पुस्तकें थीं ?
उत्तर :
गांधीजी उदार विचारधारा और सभी धर्मों के प्रति श्रद्धा रखनेवाले महापुरुष थे। उनके शैल्फ में तरह-तरह की पुस्तकें थीं। उसमें जहाँ रिफिकिंग क्रिश्चियौनिटी, हज़रत ईसा और ईसाई धर्म जैसी पुस्तकें थीं, वहीं रामचरितमानस, गीता आणि गीताई जैसी पुस्तकें भी थीं। इसके अलावा श्री स्वास्थ्य-वृत्ति, आश्रम भजनावली तथा सार्थ गुजराती जोड़णी कोश जैसी पुस्तकें भी उनके शैल्फ में थीं।
प्रश्न 4.
हे राम! की स्मृति ने लेखक को किस कठोर चट्टान पर पटक दिया ?
उत्तर :
बापू की कुटिया में लेखक अपनी कल्पना में बापू को अपने बिस्तरे पर बैठे हुए यरवदा-चक्र धुमाते हुए तथा अन्य कार्य करते हुए देखते हैं। तभी लेखक की नजर दीवार पर उभरे ‘हे राम’ शब्द पर पड़ती है। वे एकाएक कल्पना-लोक से उठकर ऐसी कठोर चट्टान पर पटक दिए जाते हैं, जहाँ ‘हे राम’ शब्द ने उन्हें बापू के अपने बीच न होने का अहसास करा दिया। उन्हें लगा कि बापू उनसे छीन लिए गए हैं।
प्रश्न 5.
बापू के तीनों बंदर इशारे से क्या कह रहे हैं ?
उत्तर :
बापू के तीनों बंदर इशारे से कह रहे हैं कि आँखें, कान और जबान बंद करके आत्मस्थ होकर देखो तो लगेगा कि बापू यहीं हैं।
4. पाँच से छ: पंक्तियों में उत्तर दीजिए :
प्रश्न 1.
बापू की कुटिया में आकर लेखक अपना सौभाग्य क्यों मानता है ?
उत्तर :
लेखक गांधीजी के जीवित रहते उनके साबरमती आश्रम नहीं आ पाया। वह इसे अपना दुर्भाग्य मानता है। उनके न रहने पर उनकी कुटी में आने पर उसे लगता है कि यदि वह उन दिनों आता तो उनके बिस्तर के निकट इतनी देर तक न बैठ पाता। उस शांत एकांत में उनकी कुटिया से इतना तादात्म्य स्थापित करने का सुख भी उसे न मिल पाता। उनके पायताने बैठकर वह अपनी लेखनी को सार्थकता भी प्रदान न कर पाता। जो तब न मिलता वह आज पाने का अवसर मिलने से लेखक स्वयं को सौभाग्यशाली मानता है।
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प्रश्न 2.
बापू के कमरे में लेखक को क्या-क्या दिखाई देता है ?
उत्तर :
बापू के कमरे में लेखक उन बहुत-सी चीजों को देखता है जिनका उपयोग बापू करते थे। लेखक खजूर की चटाई पर एक गद्दा डालकर और उसे खादी से ढककर बनाए गए बापू के बिस्तरे को देखता है। बिस्तरे पर बापू का तकिया और तुलसी की माला है। उनका प्रिय चरखा भी वहीं रखा हुआ है। बापू की घड़ी और खडाऊ भी रखे हुए हैं। कमरे की खुली अलमारी पर उनके तीनों बंदर उनकी याद दिला रहे हैं। बापू का कलमदान, रद्दी कागज डालने के लिए रखा टोकरा, पीतल का थूकदान, एक स्टैंड पर रखी पेंसिल और कताई के सामान भी कुटिया में रखे हुए हैं। बिस्तरे के पास तीन खानों का शैल्फ भी रखा हुआ है। इन सारे स्मृतिचिहनों को देखकर लेखक कुटिया को बापूमय पा रहा है।
प्रश्न 3.
बापू के बिस्तरे को लेखक क्यों महान मानता है ?
उत्तर :
लेखक बापू की कुटिया की सादगी देखकर मुग्ध हो जाता है। उसे लगता है कि हमारे ऋषियों की परंपरा अभी तक बनी हुई है। बापू के बिस्तर की सादगी लेखक को अभिभूत कर देती है। उसे लगता है कि अपनी उस सादगी में बापू सचमुच बहुत महान थे। रत्नजड़ित स्वर्ण-सिंहासन भी बापू के बिस्तर से ईर्ष्या करते होंगे। जितना महान व्यक्ति इस सारे बिस्तर पर बैठता था, उतना महान व्यक्ति उन भव्य सिंहासनों पर एक पल के लिए भी नहीं बैठा होगा। लेखक बापू के बिस्तरे को महान मानता है, क्योंकि बापू ने वर्षों तक इस पर बैठकर इसे गौरवान्ति किया था।
प्रश्न 4.
किस बात की कल्पना लेखक को भावमुग्ध कर देती है ?
उत्तर :
लेखक कुटी में बापू के कमरे में अनेक चटाइयाँ पड़ी देखता है। बापू से मिलने के लिए देश-विदेश से आनेवाले व्यक्ति उन पर बैठते और उनकी अमृतवाणी सुनते थे। लेखक सोचता है कि इन्हीं चटाइयों पर कभी जवाहरलाल नेहरू, राजेन्द्र प्रसाद, सरदार पटेल जैसे देश के बड़े नेता बैठे होंगे। इनके अतिरिक्त संसार के बड़े-सेबड़े राजनीतिज्ञ, पत्रकार और साहित्यकार भी बैठे होंगे। आज उन्हीं पर लेखक अकेला बैठा है। अपने इसी सौभाग्य की कल्पना लेखक को भावमुग्ध कर देती है।
5. आशय स्पष्ट कीजिए :
प्रश्न 1.
‘आदमी का दुर्भाग्य भी कभी-कभी सौभाग्य बन जाता है ?’
उत्तर :
मनुष्य के जीवन में सौभाग्य और दुर्भाग्य उसके प्रत्येक कार्य की सफलता और असफलता से जुड़े होते हैं। मनुष्य कार्य की सफलता को अपना सौभाग्य और असफलता को दुर्भाग्य मानता है। पर कभी-कभी मनुष्य के जीवन में दुर्भाग्य भी सौभाग्य बनकर आता है। उदाहरण के लिए एक रेलगाड़ी में किसी विशेष दिन किसी व्यक्ति को आरक्षित टिकट मिलना उसके लिए सौभाग्य का सूचक होता है।
पर जिस व्यक्ति को उस दिन कोशिश करने के बावजूद उस रेलगाड़ी में आरक्षित टिकट नहीं मिल पाता, उसके लिए यह दुर्भाग्य का सूचक होता है। पर संयोग से किसी कारणवश उस दिन गाड़ी की दुर्घटना हो जाए, तो उसमें आरक्षित टिकट पर यात्रा करनेवाले यात्री का सौभाग्य, दुर्भाग्य में बदल जाता है और आरक्षित टिकट से वंचित रह जानेवाले व्यक्ति का टिकट न पाने का दुर्भाग्य सौभाग्य में बदल जाता है। यह उस व्यक्ति का सौभाग्य ही था कि दुर्घटना होनेवाली रेलगाड़ी में उसे आरक्षित टिकट नहीं मिला और वह दुर्घटना का शिकार होने से बच गया।
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प्रश्न 2.
‘यदि सच्ची राह पर हो तो तुम्हें क्रोध करने की जरूरत ही नहीं।’
उत्तर :
सच्चाई मनुष्य का सबसे बड़ा गुण है। सच्चाई के सामने झूठ कभी नहीं टिक सकता। सच्ची राह पर चलनेवाला व्यक्ति निर्भीक होता है। उसे अपनी सच्चाई के सबूत के रूप में इधर-उधर की बेसिर-पैर की मनगढंत बातें जोड़नी नहीं पड़तीं। सच्ची राह पर चलनेवाले व्यक्ति को कितना भी उत्तेजित क्यों न किया जाए, वह अपना धैर्य कभी नहीं खोता।
इसका कारण यह है कि उसे यह पता होता है कि आखिरकार विजय उसके सच की ही होगी। सच्चाई की राह पर चलनेवाला व्यक्ति शांतिपूर्ण ढंग से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता रहता है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हैं महात्मा गांधी। वे देश को स्वतंत्र कराने का उद्देश्य लेकर सच्ची राह पर आगे बढ़े। उन पर अनेक प्रकार के अत्याचार हुए, पर उन्होंने कभी प्रतिक्रिया में कभी क्रोध नहीं किया। वे शांतिपूर्ण ढंग से निष्ठापूर्वक सच्चाई के मार्ग पर चलते रहे और एक दिन अपने उद्देश्य में सफल हुए। उन्होंने देश को आज़ाद करा कर ही दम लिया।
प्रश्न 3.
‘झूठ शब्दों में निहित नहीं है. छल करने में है। चुप्पी साधकर भी झूठ बोला जा सकता है।’
उत्तर :
आम तौर पर खुलकर साफ-साफ शब्दों में किसी सच बात को उसके विपरीत रूप में बनाकर कहना या पेश करना झूठ कहलाता . है। इसके अतिरिक्त झूठ के अन्य रूप भी हैं और ये साफ-साफ शब्दों। में झूठ बोलने से कहीं अधिक बुरे होते हैं। ये झूठ छल-कपट के रूप। में होते हैं।
ऐसे मामलों में किसी सच बात को सच न कहकर उस पर चुप्पी साधकर, दोहरे अर्थवाले शब्दों का प्रयोगकर, किसी शब्दांश पर विशेष ओर देकर, आँख से संकेतकर तथा किसी वाक्य को विशेष महत्त्व आदि देकर झूठ का प्रयोग होता है। इस प्रकार की हरकतों का गूढ अर्थ अथवा आशय साधारणतः प्रत्यक्ष रूप में नहीं खुलता, पर वास्तव में यह बहुत महत्त्व रखता है। इस प्रकार का झूठा प्रयोग बहुत भयानक होता है और इसके पीछे झूठ बोलनेवाले की बुरी नीयत होती है।
6. दिए गए विधानों की पूर्ति करके उचित विकल्प चुनकर पूरा वाक्य फिर से लिखिए :
प्रश्न 1.
अपने बिस्तरे पर बैठे बापू अपने ………. को घुमा रहे हैं।
(क) काल चक्र
(ख) यरवदा चक्र
(ग) कलमचक्र
(घ) अशोक चक्र
उत्तर :
(ख) यरवदा चक्र
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प्रश्न 2.
बापू को समझने के लिए इस छोटे से शैल्फ को ………… ही होगा।
(क) भलि-भाँति देखना
(ख) उचित प्रकार से देखना
(ग) अच्छी तरह से देखना
(घ) सूक्ष्मता से देखना
उत्तर :
(क) भलि-भाँति देखना
प्रश्न 3.
इन्हीं चदाइयों पर देश-विदेश के बड़े बड़े व्यक्ति बैठते और बापू के मुख से निकले ………. का पान करते।
(क) भजन
(ख) वक्तव्य
(ग) भाषण
(घ) वचनामृत
उत्तर :
(घ) वचनामृत
7. सामासिक शब्दों का विग्रह कर समास के प्रकार बताइए :
प्रश्न 1.
- चरणस्पर्श
- कलमदान
- रत्नजड़ित
- स्वर्ण-सिंहासन
- भावमुग्ध
- वचनामृत
उत्तर :
- चरणस्पर्श – चरणों का स्पर्श – षष्ठी तत्पुरुष समास
- कलमदान – कलम के लिए दान (रखने का पात्र) – संप्रदान तत्पुरुष समास
- रत्नजड़ित – रत्नों से जड़ित – करण तत्पुरुष समास
- स्वर्ण-सिंहासन – स्वर्ण से निर्मित सिंहासन – मध्यमपदलोपी समास
- भावमुग्ध – भाव से मुग्ध-करण तत्पुरुष समास
- वचनामृत – वचनरूपी अमृत – कर्मधारय समास
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8. प्रत्यय अलग कीजिए :
प्रश्न 1.
- हिन्दुत्व
- अर्थवाला
- साहित्यिक
- स्वच्छता
- चदाइयाँ
उत्तर :
- हिन्दुत्व – त्व
- अर्थवाला – वाला
- साहित्यिक – इक
- स्वच्छता – ता
- चटाइयाँ – याँ
GSEB Solutions Class 11 Hindi बापू की कुटिया में Important Questions and Answers
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए :
प्रश्न 1.
बापू ने अपनी चरण धूलि से किसे पवित्र किया था?
उत्तर :
बापू ने अपनी चरण धूलि से लेखक के गाँव को पवित्र किया था।
प्रश्न 2.
लेखक ने किस कहावत को सच बताया है?
उत्तर :
लेखक ने ‘देर आयद दुरुस्त आयद’ कहावत को सच बताया है।
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प्रश्न 3.
गेर (गेरु) से दीवार पर क्या लिखा है?
उत्तर :
गेर से दीवार पर ‘ओम्’ और ‘हे राम’ ये शब्द लिखे हैं।
प्रश्न 4.
लेखक ने गांधीजी की लेखनी को जादूभरी क्यों कहा है?
उत्तर :
लेखक ने गांधीजी की लेखनी को जादूभरी कहा हैं, क्योंकि उसने न जाने कितने प्राणों को उद्वेलित किया था।
प्रश्न 5.
शैल्फ की दफ्ती पर किसकी सूक्ति लिखी हुई है?
उत्तर :
शैल्क की दफ्ती पर लारिनर की सूक्ति लिखी हुई है।
प्रश्न 6.
चिकने पत्थर पर क्या लिखा है?
उत्तर :
चिकने पत्थर पर लिखा है – प्रेम ही भगवान है।
प्रश्न 7.
बापू की कुटी किनसे बनी थी?
उत्तर :
बापू की कुटी बाँस, लकड़ी और खपरैल से बनी थी।
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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दिए गए विकल्पों में से चुनकर लिखिए :
प्रश्न 1.
ओ बिस्तर! इस …………. में भी तुम कितने महान हो, क्या इसका अहसास तुम्हें कभी होता है?
(क) सफाई
(ख) सादगी
(ग) खुशी
(घ) गलती
उत्तर :
(ख) सादगी
दिए गए विधानों की पूर्ति करके उचित विकल्प चुनकर पूरा वाक्य फिर से लिखिए :
प्रश्न 1.
इसके तीसरे भाग में बापू का है।
(क) शयनागार
(ख) रसोईघर
(ग) स्नानागार
(घ) वाचनालय
उनर :
इसके तीसरे भाग में बापू का स्नानागार है।
व्याकरण
समानार्थी शब्द लिखिए :
- कृतकृत्य = धन्य-धन्य
- खडाऊँ = पादुका
- मिथ्या = झूठ
- एहसास = अनुभव
- ऊबड़-खाबड़ – ऊँची-नीची
- कुटिया = झोपड़ी
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विरुद्धार्थी शब्द लिखिए:
- दुर्भाग्य × सौभाग्य
- जिन्दगी × मृत्यु
- उचित × अनुचितू
- प्रत्यक्ष × परोक्ष
- सफल × असफल
- सार्थक × निरर्थक
- निकट × दूर
- कठोरता × कोमलता
शब्दों में से प्रत्यय अलग कीजिए :
- वंदनीय – ईय
- स्वतंत्रता – ता
- समर्पित – इत
- जीवित – इतर
- पिंडज – ज
- साहित्यकार – कार
- पत्रकार – कार
- सांसारिक – इक
- उद्वेलित – इत
शब्दों में से उपसर्ग अलग कीजिए :
- अनेक – अन्
- अमृत – अ.
- अतिथि – अ
- अनर्थ – अ
- अभिन्न – अ
- अपलक – अ
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बापू की कुटिया में Summary in Gujarati
ભાવાત્મક અનુવાદ :
લેખક રામવૃક્ષ બનીપુરીનું દુર્ભાગ્ય અને સૌભાગ્ય લેખક ગાંધીજીના આદેશ પ્રમાણે સ્વતંત્રતા આંદોલનમાં સઘન રીતે જોડાયા હતા, પરંતુ સંજોગોવસાત્ તેઓ બાપુની કુટિરમાં એમની હયાતી દરમિયાન તેમનાં દર્શન ન કરી શક્યા. આ બાબતને તેઓ દુર્ભાગ્ય અને સૌભાગ્ય પણ ગણે છે. દુર્ભાગ્ય એટલા માટે કે તેમના આવાસ પર તેમનાં દર્શન કરીને તેમની ચરણરજ માથે ન ચઢાવી શક્યા અને સૌભાગ્ય એટલા માટે કે અત્યારે તેઓ તે શાંત એકાંતમાં એક્લા તે કુટિરમાં આટલું તાદાત્મ પ્રાપ્ત કરી રહ્યા છે, જે તે સમયે આટલા વખત માટે સંભવ નહોતું.
સૂમ વર્ણન લેખક ગાંધીજી દ્વારા કુટિરમાં ઉપયોગમાં લેવાયેલી દરેક નાની-મોટી વસ્તુનું એર્ક પછી એકનું સૂક્ષ્મ વર્ણન કરે છે અને તેમાં સજીવ ગાંધીજીનાં દર્શન કરે છે. આ વસ્તુઓ લેખક સાથે વાતો કરે છે અને લેખક તેમને પ્રશ્નો પણ પૂછે છે. બાપુના ત્રણેય વાનર લેખકને બાપુનાં દર્શન કરાવે છે. લેખકે બાપુને પોતાની ગાદી ઉપર બેઠેલા વિભિન્ન ક્રિયાઓ કરતાં જુએ છે. તેમને દીવાલ પર લખેલા ‘ઓમ્” અને “હે રામ’ શબ્દોને નિહાળતા ગાંધીજી દેખાય છે.
ઋષિઓની પરંપરાઃ “હે રામ’ શબ્દથી લેખકની તંદ્રા ભંગ થાય છે. તેમને પોતાની વચ્ચે ગાંધીજી ન હોવાનો આભાસ થાય છે. તેઓ વિચારે છે કે, જે દિવસે ગોળીઓના ભયાનક ધડાકા વચ્ચે ગાંધીજીના મુખેથી ‘હે રામ’ શબ્દ નીકળ્યા હતા તે દિવસે સંસારને લાગ્યું હતું કે ઋષિઓની પરંપરા તૂટી નથી અને તેમાં એક નવી કડી જોડાઈ ગઈ છે. તેઓ દુઃખી થાય છે કે અરે, આ જ્ઞાન તેમની હત્યા કરનારને પણ હોત તો …!
ગાંધીજીની ગાદી તથા અન્ય અનેક વસ્તુઓ: ગાંધીજીની ગાદી ખજૂરની ચટાઈ પર એક ગાદલું નાખીને ખાદીની ચાદરથી ઢાંકીને બનાવવામાં આવી હતી. તેઓ વિચારે છે કે આ એ જ ગાદી છે, જેના પર આવા મહાપુરુષ બેઠા હતા. આ એ બિછાનું છે, જેની ઈર્ષ્યા રત્નજડિત સિંહાસન પણ કરતું હશે. બિછાના ઉપર લાકડાનું પાટિયું, નાનકડો તકિયો, રદી કાગળ ફેંકવા માટે પાંદડાંથી બનેલી ટોકરી, પિત્તળનું થુંકદાન,
ક્ષમદાનમાં મૂકેલી કલમ, જેમાં તેમણે લાખો લોકોને પ્રેરિત ક્યાં હતા. એક સ્ટેન્ડ પર ચરખો તથા કાંતવા માટે રૂની પૂણી અને તકલી વગેરે સામગ્રી છે અને લેખક લારિનરની ઉક્તિ : ‘‘સાચા માર્ગ પર હો તો તમારે ક્રોધ કરવાની જરૂર નથી. જો ખોટા માર્ગ પર હો તો પછી કયા મુખે આંખો લાલ-પીળી કરશો.”
બાપુનાં પુસ્તકોઃ અભરાઈના એક ખાનામાં બાપુના સાર્થ ગુજરાતી જોડણીકોશ, રિથિંકિંગ ક્રિશ્ચિયાનિટી, હઝરત ઈસા અને ઈસાઈ ધર્મ અને શ્રીમદ્ભગવદ્ગીતા. જ્યારે બીજા ખાનામાં રામચરિતમાનસ, શ્રીસ્વારઅમ-વૃત્તિ, આશ્રમ ભજનાવલી, ગીતા અને ગીતાઈ આદિ પુસ્તકો છે. તેના સિવાય બાપુના ત્રણ વાનર જેમણે બાપુના મૃત્યુના સમાચાર સાંભળીને પોતાના કાન, પોતાની આંખો અને પોતાનું મુખ હંમેશ માટે બંધ કરી દીધાં છે.
બીજી નાની નાની વસ્તુઓ સાથે છે ચટાઈ પર પાથરેલો નાનકડો ગાલીચો જેના પર અતિથિ બેસતા હતાં. આખા ધરમાં ચટાઈઓ જ ચટાઈઓ. આના પર ક્યારેક નેહરુ, રાજેન્દ્રપ્રસાદ તથા પટેલ જેવા મોટા મોટા રાજનીતિજ્ઞ, પત્રકાર, સાહિત્યકાર બેસતા હતા. તેના પર આજે લેખક એકલા બેઠા છે. આ ચાઈઓ ઉપર એક પટ્ટી પર ‘અસત્ય’ વિશે સુવચન લખ્યું છે.
કુટિરના ભાગ : બાપુની કુટિરના ત્રણ ભાગ છે, પહેલો ભાગ જ્યાં બાપુ રહેતા હતા. બીજા ભાગમાં બાપુની સેવા માટે રાજકુમારી અમૃત કૌર રહેતી હતી. ત્રીજા ભાગમાં બાપુનું સ્નાનગૃહ છે, જે તેઓ સ્વયે સાફ કરતા હતા. આ ઉપરાંત સ્નાનની સામગ્રી હતી.
કુટિયાની રચનાઃ બાપુની કુટિર વાંસ અને લાકડીથી બની હતી. ઉપર છાપરું હતું. દીવાલો વાંસની પટ્ટીઓની છે, પરંતુ કુટિર ખૂબ હવાવાળી છે. કુટિરમાં દરેક વસ્તુને લેખક નિહાળે છે અને તેમને પોતાના શબ્દોમાં પ્રસ્તુત કરે છે.
बापू की कुटिया में Summary in Hindi
विषय-प्रवेश :
लेखक ने गांधीजी के आदेश पर स्वतंत्रता आंदोलन में अपने जीवन को समर्पित कर दिया था। अनेक कष्ट सहे, संकटों से गुजरे, पर संयोग ऐसा हुआ कि वे गांधीजी के जीवनकाल में चाहकर भी उनके दर्शन नहीं कर पाए। इस बात का उन्हें दुःख जरूर रहा, पर वे अपने आप को भाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें बापू की कुटिया की प्रत्येक वस्तु को नजदीक से आत्मसात् करने का मौका मिला, जिनका उपयोग गांधीजी ने किया था।
वे इन वस्तुओं में गांधीजी के साक्षात् दर्शन करते हैं। वे अपने आप को धन्य मानते हैं कि कुटिया में गांधीजी के साथ जिस अवस्था में और जितने अधिक समय तक रहने का अवसर उन्हें मिला, शायद जीवित अवस्था में उनके दर्शन करने से ऐसा साक्षात्कार नसीब नहीं हो पाता। लेखक ने निबंध में इस दर्शन का जीवंत और भावुक चित्रण किया है।
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पाठ का सार :
लेखक रामवृक्ष बेनीपुरी का दुर्भाग्य और सौभाग्य : लेखक गांधीजी के आदेश पर स्वतंत्रता आंदोलन में गहरे जुड़े थे, पर संयोग से वे बापू की कुटिया में उनके जीते-जी उनके दर्शन नहीं कर पाए। इसे वे अपना दुर्भाग्य भी मानते हैं और सौभाग्य भी। दुर्भाग्य इसलिए कि वे उनके आवास पर उनके दर्शन कर उनकी चरणरज को माथे पर नहीं चढ़ा सके और सौभाग्य इसलिए कि अब वे उस शांत एकांत में अकेले उस कुटिया से इतना तादात्म्य प्राप्त कर रहे हैं, जो उस समय इतनी देर के लिए संभव नहीं था।
सूक्ष्म वर्णन : लेखक गांधीजी द्वारा कुटिया में उपयोग में लाई गई छोटी-बड़ी हर वस्तु का एक-एक कर सूक्ष्म वर्णन करते हैं और उनमें सप्राण गांधीजी के दर्शन करते हैं। ये वस्तुएं लेखक से बातें करती हैं और लेखक उनसे प्रश्न भी करते हैं। बापू के तीनों बंदर लेखक को बापू के दर्शन कराते हैं। लेखक बापू को अपने बिस्तर पर बैठे हुए विभिन्न क्रियाएँ करते हुए देखते हैं। उन्हें दीवार पर लिखे हुए ‘ओम्’ और ‘हे राम’ शब्दों को निहारते हुए गांधीजी दिखाई देते हैं।
ऋषियों की परंपरा : ‘हे राम’ शब्द से लेखक की तंद्रा भंग होती है। उन्हें अपने बीच गांधीजी के न होने का अहसास होता है। वे सोचते हैं कि जिस दिन गोलियों के भयानक धड़ाकों के बीच गांधीजी के मुंह से ‘हे राम’ निकला था, उस दिन संसार को लगा था कि ऋषियों की परंपरा टूटी नहीं है और उसमें एक नई कड़ी जुड़ गई है। वे दुःखी होते हैं कि काश! यह ज्ञान उनकी हत्या करनेवाले को भी होता।
गांधीजी का विस्तरा तथा अन्य अनेक वस्तुएं : गांधीजी का बिस्तरा खजूर की चटाई पर एक गद्दा डालकर और उसे खादी से ढककर बनाया गया था। वे सोचते हैं कि यह वही बिस्तर है, जिस पर इतना बड़ा आदमी तब बैठा होगा। वह बिस्तर जिससे रत्नजड़ित स्वर्ण सिंहासन भी ईर्ष्या से जलते होंगे।
बिस्तर के सिरहाने काठ की तख्ती, छोटा तकिया, रद्दी कागज डालने के लिए पत्तों का बना टोकरा, पीतल का थूकदान, कलमदान पर रखी लेखनी, जिससे उन्होंने लाखों लोगों को उद्वेलित किया था; यरवदा-चक्र तथा कताई की पूनी और – तांत आदि सामग्री है और लारिनर की उक्ति कि “सच्ची राह पर हो तो तुम्हें क्रोध करने की जरूरत नहीं, यदि गलत राह पर हो, तो किस मुंह से आंख लाल-पीली करोगे।”
बापू की पुस्तकें : शैल्फ के पहले खाने में बापू की सार्थ गुजराती जोड़णी कोश, रिथिंकिंग क्रिश्चियैनिटी, हज़रत ईसा और ईसाई धर्म, श्रीमद्भगवद्गीता जबकि दूसरे खाने में रामचरितमानस, श्री स्वास्थ्यवृत्ति, आश्रम भजनावली तथा गीता आणि गीताई आदि पुस्तकें हैं। इसके अलावा हैं बापू के तीन बंदर, जिन्होंने बापू की मृत्यु की खबर सुनकर अपने कान, अपनी आँखें और अपना मुंह सदा के लिए बंद कर लिए हैं।
अन्य छोटी-छोटी वस्तुओं के साथ है चटाई पर बिछा छोटा-सा कालीन जिस पर अतिथि बैठते थे। सारे घर में चटाइयां ही चटाइयाँ। इन्हीं पर कभी नेहरू, राजेन्द्र प्रसाद तथा पटेल जैसे बड़े-बड़े राजनीतिज्ञ, पत्रकार, साहित्यकार बैठते थे। उन्हीं पर आज लेखक अकेले बैठे हैं। इन चटाइयों के ऊपर एक दफ्ती पर ‘झूठ’ के बारे में सुवचन लिखा है।
कुटिया के भाग : बापू की कुटिया के तीन भाग हैं। पहला भाग वह जहाँ बापू रहते थे। मध्य भाग में बापू की सेवा के लिए राजकुमारी अमृत कौर रहती थीं। तीसरे भाग में बापू का स्नानागार है, जिसे वे स्वयं स्वच्छ करते थे। इसके अलावा है स्नान सामग्री।
कुटिया की रचना : बापू की कुटिया बाँस और लकड़ी की बनी है। ऊपर खपरैल है। दीवारें बांस की फट्टियों की हैं। पर कुटी खूब हवादार है। कुटिया की एक-एक वस्तु को लेखक निहार रहे हैं और उनको अपने शब्दों में पिरोते जा रहे हैं।’
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बापू की कुटिया में शब्दार्थ :
- पायताने – चारपाई का पैर फैलाने की ओर का भाग।
- विश्ववंद्य – विश्वभर मैं वंदनीय।
- चरणरज – चरणों की धूल।
- कृतकृत्य – धन्य-धन्य।
- तादात्म्य – एक वस्तु का दूसरी से अभिन्न होने का भाव।
- श्वेत-शुभ – सफेद-देदीप्यमान।
- हृदयकारी – सुंदर।
- आत्मस्थ – आत्मा में स्थित।
- उभाड़ – उभरा हुआ।
- अनर्थ – अनिष्ट।
- उद्भिज – वनस्पति।
- अंडज – अंडे से उत्पन्न होने वाले जीव।
- पिंडज – गर्भ से उत्पन्न होनेवाले।
- उद्वेलित – (यहाँ) प्रेरणा देना।
- खुशनुमा – देखने में भला लगनेवाला, सुंदर।
- वचनामृत – वचनरूपी अमृत।
- भावमुग्ध – भावमोहित
- अपलक – पलक झपकाए बिना।