GSEB Std 11 Hindi Textbook Solutions Chapter 16 कल्पना-शक्ति
Gujarat Board GSEB Hindi Textbook Std 11 Solutions Chapter 16 कल्पना-शक्ति Textbook Exercise Important Questions and Answers, Notes Pdf.
GSEB Std 11 Hindi Textbook Solutions Chapter 16 कल्पना-शक्ति
GSEB Std 11 Hindi Digest कल्पना-शक्ति Textbook Questions and Answers
स्वाध्याय
1. निम्नलिखित दिए गये विकल्पो में से सही विकल्प चुनकर प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
प्रश्न 1.
कल्पना-शक्ति किस संस्कार का परिणाम है ?
(क) पाश्चात्य
(ख) नवीन
(ग) भारतीय
(घ) प्राकतन
उत्तर :
कल्पना-शक्ति प्राचीन संस्कार का परिणाम है।
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प्रश्न 2.
मतिराम और भूषण कैसी कविता लिखते थे ?
(क) रौद्र रस से परिपूर्ण
(ख) श्रृंगार रस से परिपूर्ण
(ग) वीर रस से परिपूर्ण
(घ) करुण रस से परिपूर्ण
उत्तर :
मतिराम और भूषण वीर रस से परिपूर्ण कविता लिखते थे।
प्रश्न 3.
कपिल ने कितने तत्त्वों की चर्चा की है ?
(क) 23
(ख) 25
(ग) 27
(घ) 28
उत्तर :
कपिल ने 25 तत्त्वों की चर्चा की है।
प्रश्न 4.
लेखक कल्पना को लेकर कैसे रहने के लिए कहते हैं. ?
(क) चौकस
(ख) निश्चिंत
(ग) अनिश्चित
(घ) भुलक्कड़
उत्तर :
लेखक कल्पना को लेकर चौकस रहने के लिए कहते हैं।
प्रश्न 5.
लेखक ने कल्पनाजन्य को कैसा बताया ?
(क) सुखदायक
(ख) दुखदायक
(ग) क्षणिक और नश्वर
(घ) भावनामय
उत्तर :
लेखक ने कल्पनाजन्य को क्षणिक और नश्वर बताया।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के एक-एक वाक्य में उत्तर दीजिए :
प्रश्न 1.
गीतगोविंद किसकी रचना है ?
उत्तर :
गीतगोविंद शृंगार-रस के प्रसिद्ध कवि जयदेव की रचना है।
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प्रश्न 2.
लेखक ने कल्पना की कैसी बला कहा है ?
उत्तर :
किसी ने कल्पना-पिशाचिनी का ओर-छोर नहीं पाया।
प्रश्न 3.
रेखागणित के प्रवर्तक कौन है ?
उत्तर :
रेखागणित के प्रवर्तक उक्लैदिस (यूक्लिड) हैं।
प्रश्न 4.
मनुष्य में सबसे बड़ी अद्भुत शक्ति कौन-सी है ?
उत्तर :
मनुष्य में सबसे बड़ी अद्भुत शक्ति उसकी कल्पना-शक्ति है, जिसे ‘प्रतिभा’ भी कहते हैं।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के दो-दो वाक्यों में उत्तर दीजिए :
प्रश्न 1.
कविजन नई-नई रचनाओं के जरिए क्या दिखलाते हैं. ?
उत्तर :
कविगण अपनी कल्पना-शक्ति के द्वारा जगत-स्रष्टा ब्रह्मा के साथ होड़ करते हैं। वे अपनी नई-नई रचनाओं के जरिए न जाने कितनी सृष्टि-निर्माण चातुरी दिखलाते हैं।
प्रश्न 2.
लेखक किन कवियों की कल्पना-शक्ति पर चित्त-चकित और मु ग्ध है?
उत्तर :
कवियों की रचनाओं में कल्पना-शक्ति का पूर्ण उद्गार देखा जाता है। इस दृष्टि से कवि कालिदास, श्रीहर्ष, शेक्सपीयर तथा मिल्टन आदि कवियों की कल्पना-शक्ति पर चित्त-चकित और मुग्ध है।
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प्रश्न 3.
कवि अपनी कल्पना-शक्ति के द्वारा किसके साथ होड़ करना अनुचित समझते हैं ?
उत्तर :
कवि अपनी कल्पना-शक्ति के द्वारा जगत के स्रष्टा ब्रह्मा के साथ होड़ करना अनुचित नहीं समझते हैं। इसका कारण यह है कि जगत-स्रष्टा ब्रह्मा तो एक ही बार जो कुछ बन पड़ा, सृष्टि-निर्माण कौशल दिखाकर मुक्त हो गए, पर कवि अपनी कल्पना-शक्ति के द्वारा नित्य नई-नई रचनाएं गढ़कर सृष्टि-निर्माण चातुरी दिखलाते रहते हैं।
प्रश्न 4.
‘कल्पना-शक्ति’ में किनको परखने की कसौटी है ?
उत्तर :
कल्पना-शक्ति में कल्पना करनेवाले व्यक्ति के हृदयगत भाव या मन को परखने की कसौटी है।
4. निम्नलिखित प्रश्नों के पाँच-छः वाक्यों में उत्तर दीजिए :
प्रश्न 1.
बालकृष्ण भट्ट के निबंध-लेखन की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए ।
उत्तर :
श्री बालकृष्ण की गिनती हिन्दी के अच्छे निबंधकारों में की जाती है। उन्होंने विविध विषयों पर निबंध लिखे हैं। उनके निबंध कल्पना प्रधान नहीं हैं। वे निबंधों में व्यवहारबुद्धि को अधिक महत्त्व देते हैं। उनकी शैली सरल और सरस है। उनकी रचनाओं में व्यंग्य की गुदगुदी मिलती है।
प्रश्न 2.
लेखक ने कल्पना-पिशाचिनी अथवा भूतनी किस भाव से कहा है ?
उत्तर :
लेखक ने कल्पना को एक महत्त्वपूर्ण शक्ति माना है। उसके अनुसार कवियों और लेखकों ने इस शक्ति के बल पर ही अमर काव्य और साहित्य की रचनाएं की हैं। परंतु लेखक ने व्यंग्य करते हुए कल्पना को भूतनी या पिशाचिनी भी कहा है। लेखक मानते है कि सिर्फ कल्पना करना ही पर्याप्त नहीं होता। कल्पना के साथ-साथ अभ्यास का होना भी जरूरी है। वरना संपूर्ण भारत ही इस कल्पना के पीछे नष्ट हो गया, जहाँ कल्पना के अलावा कर दिखाने योग्य कुछ रहा ही नहीं।
5. आशय स्पष्ट कीजिए :
प्रश्न 1.
यह कल्पना बुरी बला है।
उत्तर :
मनुष्य तरह-तरह की कल्पनाएँ करता है। निरर्थक कल्पना : करना हवा में तीर मारने के समान होता है। कल्पना का तब तक कोई – उपयोग नहीं होता, जब तक उसे कार्य रूप में परिणत न किया जाए। : इसलिए मन बहलाव के लिए तरह-तरह की कल्पनाएं करना बुरी बला ही है।
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प्रश्न 2.
मनुष्य की अनेक शक्तियों में कल्पना-शक्ति भी एक अद्भुत शक्ति है।
उत्तर :
मनुष्य अपनी मानसिक शक्तियों के बल पर अनेक कार्य पूरे करता है। उसकी विभिन्न मानसिक शक्तियों में कल्पना-शक्ति एक अद्भुत शक्ति है। कल्पना-शक्ति के बल पर ही अनेक लोग बड़े-बड़े कवि, विचारक, वैज्ञानिक, विभिन्न सिद्धांतों के प्रवर्तक और प्रतिभावान मनुष्य कहलाते हैं, जिनकी चर्चा देश-दुनिया में होती है। इस तरह मनुष्य की कल्पना-शक्ति भी एक अद्भुत शक्ति है।
6. सविग्रह समास भेद बताइए :
प्रश्न 1.
- तर्क-वितर्क
- सृष्टि-निर्माण-कौशल
- महादार्शनिक
उत्तर :
- तर्क-वितर्क – तर्क और वितर्क – द्वन्द्व समास
- महादार्शनिक – महान् दार्शनिक – कर्मधारय समास
- सृष्टि-निर्माण – सृष्टि का निर्माण – तत्पुरुष समास
- निर्माण-कौशल – निर्माण का कौशल – तत्पुरुष समास
7. लेखक ने निम्नलिखित शब्दों का व्यंग्य के लिए किस तरह उपयोग किया है ?
प्रश्न 1.
लेखक ने निम्नलिखित शब्दों का व्यंग्य के लिए किस तरह उपयोग किया है ?
गौतम, कपिल, कल्पना
उत्तर :
लेखक कहते हैं कि इस कल्पना-पिशाचिनी का ओर-छोर किसी ने नहीं पाया है। अनुमान करते-करते हैरान होकर गौतम मुनि ‘गौतम’ हो गए। कपिल बेचारे पच्चीस तत्त्वों की कल्पना करते-करते पीले पड़ गए। यह कल्पना बुरी बला है। इससे चौकस रहने में ही भलाई है। इसके पेच में पड़ोगे तो पछताना ही पड़ेगा।
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8. दिए गए विकल्पों में रिक्त-स्थान की पूर्ति उचित विकल्प चुनकर कीजिए :
प्रश्न 1.
कल्पना-शक्ति …………. शक्ति हैं।
(क) ईश्वरप्रदत्त
(ख) भावप्रदत्त
(ग) कल्पनाप्रदत्त
(घ) अनुभव-प्रदत्त
उत्तर :
(क) ईश्वरप्रदत्त
प्रश्न 2.
कल्पना-शक्ति को …………. के नाम से पुकारते हैं।
(क) शक्ति
(ख) प्रतिभा
(ग) ज्ञान
(घ) प्रभा
उत्तर :
(ख) प्रतिभा
प्रश्न 3.
कल्पना-शक्ति के द्वारा …………. के साथ होड़ करना कुछ अनुचित नहीं है।
(क) विष्णु
(ख) ब्रह्मा
(ग) महेश
(घ) शंकर
उत्तर :
(ख) ब्रह्मा
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GSEB Solutions Class 11 Hindi कल्पना-शक्ति Important Questions and Answers
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए:
प्रश्न 1.
किसी ने किसका ओर-छोर नहीं पाया?
उत्तर :
किसी ने कल्पना-पिशाचिनी का ओर-छोर नहीं पाया।
प्रश्न 2.
प्रतिभा का पूर्ण उद्गार कहाँ देखा जा सकता है?
उत्तर :
प्रतिभा का पूर्ण उद्गार कवियों और लेखकों की अमर – कृतियों में देखा जा सकता है।
व्याकरण
समानार्थी शब्द लिखिए :
- सूक्ष्म = बारीक
- अंत:करण = हृदय
- कसौटी = जाँच, परीक्षण
- अनुमान = अंदाज
- मिथ्या = झूठ, व्यर्थ
- निष्कर्ष = निचोड़
विरुद्धार्थी शब्द लिखिए :
- अधिक × कम
- सूक्ष्म × स्थूल
- आरंभ × अंत
- अनुचित × उचित
- उपयुक्त × अनुपयुक्त
- नाशवान × शाश्वत
- शुष्क × आई
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शब्दों में से उपसर्ग अलग कीजिए:
- अनुचित – अन्
- उपयुक्त – उप
- अनुमान – अनु
- संपूर्ण – सम्
- निष्कर्ष – निः (निस)
- अतिरिक्त – अति
- सम्माननीय – सम्
- अभ्यास – अभि
- अनेक – अन्
- निरर्थक – निर्
शब्दों में से प्रत्यय अलग कीजिए:
- मानसिक – इक
- रसीली – इली
- बुद्धत्व – त्व
- नाशवान – वान
- पाठक – यक
- झूठा – आ
- अंकुरित – इत
- पिशाचिनी – इनी
गाणितिक – इक - क्षणिक – इक
कल्पना-शक्ति Summary in Gujarati
ભાવાત્મક અનુવાદ :
મનુષ્યને અદ્ભુત પ્રાપ્તિ કલ્પનાશક્તિ ઈશ્વર દ્વારા મનુષ્યને મળેલી એક અદ્દભુત પ્રાપ્તિ છે. સંસારમાં મનુષ્યને છોડીને કોઈ પણ અન્ય પ્રાણીને આ શક્તિ મળી નથી.
અભ્યાસથી વિકાસ : કોઈ કોઈ વ્યક્તિમાં જન્મથી જ કલ્પનાશક્તિનાં બીજ અંકુરિત થઈ જાય છે અને ઉંમર વધતાં તેનો વિકાસ થતો જાય છે. જો અભ્યાસ કરવામાં આવે, તો તેનો સો ગણો વિકાસ થઈ જાય છે. કવિઓ અને લેખકો આ બાબતનું પ્રત્યક્ષ પ્રમાણ છે. તેઓ પોતાની નવી નવી રચનાઓ દ્વારા જાણે કેટલીય સુષ્ટિનિમણની ચતુરાઈ બતાવતા રહે છે.
મન પારખવાની કસોટી : કલ્પનાશક્તિ કલ્પના કરનારાના હૃદયમાં રહેલી ભાવનાને પારખવાની કસોટી હોય છે. શાંત કે વીર સ્વભાવવાળા કવિ પોતાના સ્વભાવ અનુસાર રચનાઓ કરશે, તેમનામાં શૃંગારરસ પ્રધાન કલ્પના કદી જાગ્રત થશે નહિ. વીરરસના કાવ્યને માટે ભૂષણ તથા શૃંગારરસને માટે જયદેવની રચનાઓ વધુ યોગ્ય હતી.
કલ્પનાનો છેડો હોતો નથી એવા મહાન અનેક વિચારકો થયા છે, જેમની કલ્પનાનો છેડો હોતો નથી. ગૌતમ મુનિ (ગૌતમ), કન્નાદ મુનિ, કપિલ મુનિ, વ્યાસ મુનિ, રેખાગણિતના પ્રવર્તક યુક્લિડ, યુરોપના અનેક વૈજ્ઞાનિકો વગેરેની કલ્પનાનો છેડો નહોતો.
કલ્પનાશક્તિની સાથે સાથે અભ્યાસ પણ જરૂરીઃ લેખક વ્યંગ્યમાં કહે છે કે, ફક્ત કલ્પના કરવી પર્યાપ્ત નથી. કલ્પનાની સાથે સાથે અભ્યાસ પણ ખૂબ મહત્ત્વપૂર્ણ છે; નહિ તો સંપૂર્ણ ભારત જ આ કલ્યમાની પાછળ નષ્ટ થઈ જાય. જ્યાં કલ્પના સિવાય દર્શાવવા લાયક કંઈ હોય જ નહિ.
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कल्पना-शक्ति Summary in Hindi
विषय-प्रवेश :
इस पाठ में मनुष्य की एक ऐसी अद्भुत शक्ति के महत्त्व के बारे में बताया गया है, जो पृथ्वी पर पाए जानेवाले सभी जीवित प्राणियों में केवल मनुष्य को ही प्राप्त है। यह है मनुष्य की कल्पना-शक्ति। यह शक्ति मनुष्य की प्रतिभा की परिचायक है। कवियों और लेखकों में कल्पना-शक्ति सबसे अधिक होती है। अपनी कल्पनाशीलता के बल पर ही वे अमर काव्य और साहित्य की रचना करते हैं। लेखक के अनुसार कल्पना-शक्ति के साथ-साथ अभ्यास का होना भी बहुत जरूरी है।
पाठ का सार :
मनुष्य को अदभुत देन : कल्पना-शक्ति ईश्वर द्वारा मनुष्य को प्रदान की गई एक अद्भुत देन है। संसार में मनुष्य को छोड़कर किसी भी अन्य प्राणी को यह शक्ति प्राप्त नहीं है।
अभ्यास से विकास : किसी-किसी व्यक्ति में जन्म से ही कल्पनाशक्ति के बीज अंकुरित हो जाते हैं और उम्र बढ़ने के साथ इसका विकास होता जाता है। यदि अभ्यास किया जाता रहे, तो इसका सौ गुना विकास हो सकता है। कवि और लेखक इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं, जो अपनी नई-नई रचनाओं से जाने कितनी सृष्टि-निर्माण की चतुराई दर्शाते रहते हैं।
मन को परखने की कसौटी : कल्पना-शक्ति कल्पना करनेवाले के हृदय के अंदर की भावना को परखने की कसौटी होती है। शांत या वीर प्रकृतिवाले कवि अपनी प्रकृति के अनुसार ही रचनाएँ करेंगे, उनसे शृंगार-रस प्रधान कल्पना कभी नहीं बन पड़ेगी। वीर रस के काव्य के लिए भूषण तथा शृंगार-रस के लिए जयदेव की रचनाएं विशेषरूप से उपयुक्त थीं।
कल्पना का आरपार नहीं : अनेक ऐसे महान विचारक हुए हैं, जिनकी कल्पना का आरपार नहीं है। गौतम मुनि (गौतम), कणाद मुनि, कपिल मुनि, व्यास मुनि, रेखागणित के प्रतीक यूक्लिड, यूरोप के अनेक वैज्ञानिकों आदि की कल्पना का ओर-छोर नहीं था।
कल्पना-शक्ति के साथ-साथ अभ्यास जरूरी : लेखक व्यंग्य में कहते हैं कि सिर्फ कल्पना करना ही पर्याप्त नहीं होता। कल्पना के साथ-साथ अभ्यास बहुत महत्त्वपूर्ण होता है। वैसे संपूर्ण भारत ही इस कल्पना के पीछे नष्ट हो गया, जहाँ कल्पना के अलावा करके दिखाने योग्य (प्रैक्टिकल) कुछ रहा ही नहीं।’
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कल्पना-शक्ति शब्दार्थ :
- मानसिक – मन में होनेवाला।
- शतगुण – सौ गुनी।
- अंतःकरण – हृदय, मन।
- उद्गार – दिल की बात का बाहर निकलना।
- प्रभृति – इत्यादि।
- प्राक्तन – प्राचीन।
- प्रदत्त – दिया हुआ।
- स्रष्टा – रचना करनेवाला।
- फरागत – अलग, मुक्त।
- पगी – से पूर्ण होना, डूबी हुई।
- यावत-मिथ्या – सब झूठ।
- दाख – द्राक्ष, अंगूर।
- दरोग – असत्य, झूठ।
- किबलेगाह – सम्माननीय व्यक्ति।
- किनका – टूटा हुआ दाना।
- क्षणभंगुर – थोड़ी ही देर में मिट जानेवाला।
- हेय – छोड़ने योग्य।
- नश्वर – नष्ट हो जानेवाला।
- गारत – नष्ट, बरबाद।
- कल्पना – विलाप करना, शब्दों में व्यक्त करते हुए रोना।
- चौकस – होशियार।