GSEB Std 11 Hindi Textbook Solutions Purak Vachan Chapter 4 गुरु-पर्व
Gujarat Board GSEB Hindi Textbook Std 11 Solutions पूरक वाचन Chapter 4 गुरु-पर्व Textbook Exercise Important Questions and Answers, Notes Pdf.
GSEB Std 11 Hindi Textbook Solutions Purak Vachan Chapter 4 गुरु-पर्व
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-तीन वाक्यों में लिखिए :
प्रश्न 1.
गुरु नानक देव ने लोगों को क्या शिक्षाएं दी?
उत्तर :
गुरु नानक देव निराकार ईश्वर के भक्त थे। वे श्रम को महत्त्व देते थे और लोगों को मेहनत से रोजी-रोटी कमाने का पाठ सिखाते थे। वे कहते थे कि सारे मनुष्य समान हैं। जाति के अनुसार समाज का बंटवारा गलत है। वे सतीप्रथा के विरोधी थे।
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प्रश्न 2.
गुरु-पर्व किस प्रकार मनाया जाता है?
उत्तर :
सिक्ख लोग गुरु नानक के जन्मदिवस को गुरु-पर्व के रूप में मनाते हैं। इस दिन गुरुद्वारों को खूब सजाया जाता है। उनके भक्त गुरुवाणी गीत के रूप में गाते हैं। इस दिन प्रभातफेरियां निकाली जाती हैं। शाम को बहुत बड़ा जुलूस निकाला जाता है। इस प्रकार गुरु-पर्व बड़ी श्रद्धा-भक्ति एवं उल्लासपूर्वक मनाया जाता है।
प्रश्न 3.
नानक देव दुनियादारी के जीव नहीं थे – स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
बचपन में नानक देव परमात्मा की भक्ति में डूबे रहते थे। बड़े हुए तो पिता ने उन्हें व्यवसाय के लिए पैसे दिए, जो उन्होंने साधु-संतों की सेवा में खर्च कर दिए। नवाब दौलत खाँ के यहाँ नौकरी मिली, तो वहाँ भी वे गरीबों की सेवा में ही लगे रहे। एक दिन तेरह सेर आटा तौलते समय उन्होंने सारा आटा एक गरीब को दे दिया। इन घटनाओं से सिद्ध होता है कि नानक देव दुनियादारी के जीव नहीं थे।
प्रश्न 4.
नानक देव ने शोषण के प्रति अपना विरोध किस प्रकार प्रकट किया?
उत्तर :
नानक देव मेहनत से रोजी-रोटी कमाने के पक्षपाती थे। एक बार एक धनी आदमी का निमंत्रण ठुकराकर एक बढ़ई के घर की रूखी-सूखी रोटी खाई। जब धनी आदमी ने शिकायत की तो नानकजी ने दोनों की रोटियों को निचोड़कर दिखाया। गरीब की रोटी में से दूध और धनी आदमी की रोटी में से खून की बूंदें टपकीं। इस प्रकार नानक देव ने शोषण के प्रति अपना विरोध प्रकट किया।
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प्रश्न 5.
नानक देवजी किन बातों के खिलाफ थे?
उत्तर :
नानक देवजी निराकार ईश्वर के भक्त थे। वे मूर्तिपूजा को नहीं मानते थे। वे जाति-पाँति के नाम पर समाज में होनेवाले भेदभाव के विरोधी थे। वे खुद कमाकर खाने की शिक्षा देते थे। वे सतीप्रथा का भी खुलकर विरोध करते थे। नानक देव शोषण के खिलाफ थे। धनवान के घर की रोटी से खून की और बढ़ई की रोटी से दूध की बूंदें टपकीं। इस तरह उन्होंने शोषण का विरोध किया।
प्रश्न 6.
सिक्ख धर्म की क्या विशेषताएं हैं?
उत्तर :
सिक्ख धर्म के स्थापक गुरु नानक देव थे। वे आदि गुरु माने जाते हैं। इसमें कुल दस गुरु हुए। अंतिम गुरु गोविंद सिंह थे। गुरुओं के जन्मदिवस गुरु-पर्व के रूप में श्रद्धा-भक्ति एवं धूमधाम से मनाए जाते हैं। दसवें गुरु के बाद इस धर्म में ग्रंथ साहब को गुरु के रूप में माना जाता हैं। इसमें गुरु नानक के उपदेशों के अतिरिक्त संत कबीर तथा अन्य संतों की अच्छी बातों को शामिल किया गया है। सिक्ख धर्म में मूर्तिपूजा नहीं होती। इसमें निराकार ईश्वर को माना जाता है। इसलिए इसमें जातिप्रथा नहीं है।
गुरु-पर्व Summary in Hindi
विषय-प्रवेश :
गुरु नानक देव सिख धर्म के आदि गुरु हैं। उनके जन्मदिन को गुरु-पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस पाठ में गुरु पर्व पर मनाए जानेवाले धार्मिक समारोह तथा गुरु नानक देवजी के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है।
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पाठ का सार :
गुरु-पर्व : गुरु नानक देव सिक्ख धर्म के आदि गुरु हैं। हर कार्तिक पूर्णिमा को अक्तूबर-नवंबर के महीने में गुरु नानक देव का जन्मदिवस गुरु-पर्व के रूप में मनाया जाता है। गुरु-पर्व को गुरुद्वारों को खूब सजाया जाता है। उनके भक्त गुरुवाणी गीत के रूप में गाते हैं। इस दिन प्रभातफेरियां निकाली जाती है और शाम को बहुत बड़ा जुलूस निकाला जाता है। सारे रास्ते गुरु ग्रंथ साहब का पाठ होता रहता है।
गुरु नानक देव का बचपन : गुरु नानक देव का जन्म लाहौर से कुछ दूर एक गांव में सन् 1429 में हुआ था। नानक देवजी बचपन से ही बहुत बुद्धिमान और धार्मिक विचारों के थे। अपनी गहरी सोच के कारण वे संस्कृत, अरबी, फारसी के बड़े विद्वान बन गए।
साधु-संतों और गरीबों की सेवा : बचपन में नानक देवजी परमात्मा की भक्ति में डूबे रहते थे। बड़े होने पर उनके पिताजी ने उनको कुछ पैसे व्यवसाय के लिए दिए, तो उन्होंने उसे साधु-संतों की सेवा में खर्च कर दिया। अठारह साल की उम्र में उन्हें नवाब दौलत खों के यहां नौकरी मिली, तो वहाँ भी वे गरीबों की सेवा में लगे रहे। इसके कारण वे नौकरी से हटा दिए गए।
पारिवारिक जीवन : गुरु नानक देव की शादी सुलक्षणा देवी से हुई थी। उनके दो बेटे लक्ष्मीदास और श्रीचंद पैदा हुए।
वैराग : गुरु नानक देव का मन गृहस्थाश्रम में नहीं लगा। दुनियादारी से जी ऊब जाने के कारण तीस वर्ष की आयु में उन्होंने वैराग ले लिया। वे निराकार ईश्वर के भक्त थे और मेहनत से रोजी-रोटी कमाने का पाठ देते थे। वे कहते थे कि सारे मनुष्य बराबर हैं। उनके कथन, वचन गुरुग्रंथ साहब में इकट्ठा किए गए हैं, जो सिक्खों का पवित्र ग्रंथ है।
यात्राएँ : कहा जाता है, गुरु नानकजी मक्का और बगदाद भी गए थे, जहाँ खलीफा ने उनका बहुत स्वागत किया था। फिर वे ईरान होते हुए बुखारा पहुंचे। देश लौटकर वे गुरुदासपुर के गाँव करतारपुर में बस गए। सन् 1539 ईस्वी को आप अपने ईश्वर से जा मिले। गुरु नानक देव को माननेवाले लोग सिक्ख कहलाते हैं।
गुरु गोविंद सिंह : गुरु गोविंद सिंह सिक्खों के दसवें और अंतिम गुरु थे। गुरु गोविंद सिंह का जन्मदिन भी गुरु-पर्व कहलाता है। यह पूस अर्थात् दिसंबर-जनवरी में आता है। यह भी गुरु नानक के जन्मदिन की तरह मनाया जाता है। गुरु गोविंद सिंह का जन्म पटना में हुआ था। इस दिन गुरुद्वारा पटनासाहब में दर्शन करनेवालों की भीड़ होती है। इस अवसर पर अखंड पाठ होता है।
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गुरु-पर्व शब्दार्थ :
- मवेशी – पशु।
- सेर – वजन करने का पुराना माप।
- बैराग – संन्यास।
- रईस – धनवान।
- खलीफा – पैगंबर का उत्तराधिकारी।
- प्रभातफेरी – सवेरे दल बांधकर गाते, नारे लगाते शहर का चक्कर लगाना।
- लंगर – बहुत लोगों का भोजन एकसाथ बनाने का स्थान।
- खालसा – सिक्खों का एक प्रमुख पंथ।
- सूफी – इस्लाम धर्म में प्रेममार्ग की शाखा।
- अनुयायी – अनुगामी, किसी के पीछे चलनेवाला।
- अखंड – (यहाँ) लगातार, निरंतर।