GSEB Std 12 Hindi Vyakaran वाक्यविचार
Gujarat Board GSEB Hindi Textbook Std 12 Solutions Vyakaran वाक्यविचार Questions and Answers, Notes Pdf.
GSEB Std 12 Hindi Vyakaran वाक्यविचार
स्वाध्याय
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो वाक्यों में दीजिए।
प्रश्न 1.
उद्देश्य किसे कहते हैं ?
उत्तर :
वाक्य के उस खंड को, जिसके बारे में कुछ कहा जाता है, उद्देश्य कहते हैं। जैसे – मोहन दौड़ता है वाक्य में ‘मोहन’ उद्देश्य है।
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प्रश्न 2.
विधेय किसे कहते हैं ?
उत्तर :
वाक्य के उस खंड को, जिसमें उद्देश्य के विषय में प्रकाश पड़ता है, विधेय कहते हैं। जैसे- ‘मोहन दौड़ता है’ वाक्य में ‘दौड़ता है’ विधेय है।
प्रश्न 3.
निषेधवाचक वाक्य किसे कहते हैं ?
उत्तर :
जिस वाक्य में क्रिया के न करने या न होने का कथन होता है, उसे निषेधवाचक वाक्य कहते हैं। जैसे- मैं गांव नहीं जाऊँगा।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर चार-पाँच वाक्यों में दीजिए।
प्रश्न 1.
प्रश्नवाचक वाक्य किसे कहते हैं?
उत्तर :
प्रश्नवाचक वाक्य, अर्थ के आधार पर वाक्य के आठ भेदों में से एक है। इस प्रकार के वाक्य में किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति से कुछ प्रश्न किया जाता है। इसे प्रश्नवाचक वाक्य कहते हैं। जैसे – हरीश को आखिर क्या हो गया? अथवा क्या विद्यालय में आज अवकाश है?
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प्रश्न 2.
मिश्र वाक्य किसे कहते हैं ?
उत्तर :
मिश्र वाक्यरचना की दृष्टि से वाक्य के तीन प्रकारों में से एक है। जिस वाक्य में कोई अन्य उपवाक्य अथवा अंग वाक्य मिला हो, उसे मिश्र वाक्य कहते हैं। जैसे- मैं जानता हूँ कि वह अभी आया है। इस वाक्य में ‘मैं जानता हूँ’ साधारण वाक्य हैं तथा ‘वह अभी आया’ अंग वाक्य या उपवाक्य है। इस प्रकार दोनों के योग से बना यह वाक्य मिश्र वाक्य कहलाता है। मिश्र वाक्य में संज्ञा उपवाक्य, विशेषण उपवाक्य या क्रिया विशेषण उपवाक्य होते हैं।
प्रश्न 3.
संयुक्त वाक्य किसे कहते हैं?
उत्तर :
संयुक्त वाक्य, रचना की दृष्टि से वाक्य के तीन प्रकारों में से एक है। जिस वाक्य में साधारण तथा मिश्र वाक्यों का अव्ययों के माध्यम से मेल होता हो, वहाँ संयुक्त वाक्य होता है। इसमें एक से अधिक उपवाक्य होते हैं। जैसे – ‘जैसे ही तुम गए, वह छत से कूदा और उसके पैर में चोट लग गई तभी मैं उसे लेकर अस्पताल गया।’
वाक्यविचार Summary in Hindi
विषय-प्रवेश :
जब भी हम अपने मन की बात दूसरों तक पहुंचाना चाहते हैं, तो वाक्यों का प्रयोग करते हैं। इस पाठ में वाक्यों के अर्थ और रचना के आधार पर उसके विभिन्न भेदों के बारे में बताया गया है। यहां इनके बारे में संक्षेप में विवरण दिया गया है। विद्यार्थी पाठ्यपुस्तक से इसका विस्तार से अध्ययन करें।
पाठ का सार :
वाक्य : विभिन्न शब्दों के उस सानुशासित ध्वनिसमूह को वाक्य कहते हैं, जिसमें विशेष अभिप्राय का बोध होता है। स्पष्टता वाक्यरचना की सबसे बड़ी विशेषता होती है। संक्षिप्तता, माधुर्य, संतुलन आदि वाक्यों के गुण हैं। वाक्य में आकांक्षा, योग्यता एवं क्रम का होना अत्यावश्यक है।
उद्देश्य और विधेय : प्रत्येक वाक्य से कोई-न-कोई अभिप्राय अवश्य निकलता है। इस अभिप्राय को दो खंडों में विभाजित किया जाता है : (1) उद्देश्य और (2) विधेय। वाक्य के उस खंड को उद्देश्य कहते हैं, जिसके बारे में कुछ कहा जाता है। वाक्य के उस खंड को विधेय कहते हैं, जिसमें उद्देश्य के विषय में प्रकाश पड़ता है। ‘मोहन दौडता है’ वाक्य में मोहन उद्देश्य है और दौड़ता है विधेय है।
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वाक्य के भेद:
अर्थ की दृष्टि से : अर्थ की दृष्टि से वाक्य के आठ भेद हैं : (1) विधिवाचक वाक्य, (2) निषेधवाचक वाक्य, (3) प्रश्नवाचक वाक्य, (4) आज्ञावाचक वाक्य, (5) विस्मयादिबोधक वाक्य, (6) संदेहवाचक वाक्य, (7) इच्छावाचक वाक्य और (8) संकेतवाचक वाक्य।
रचना की दृष्टि से : रचना की दृष्टि से वाक्य के तीन भेद हैं : (1) साधारण व सरल वाक्य, (2) मिश्रित वाक्य और (3) संयुक्त वाक्य।
वाक्यरचना के साधारण नियम :
वाक्य को व्यवस्थित क्रम में रखने के लिए कुछ सामान्य नियम हैं। वाक्य के संयत रूप को पदक्रम कहा जाता है।
क्रम : वाक्य में आरंभ में कर्ता, मध्य में कर्म तथा सबसे अंत में क्रिया होती है।
अन्वय : वाक्य की क्रम संगति अथवा शब्दों अथवा शब्दों के तालमेल को अन्वय कहते हैं। इसमें लिंग, वचन, पुरुष और काल का एकदूसरे से ताल-मेल बैठाया जाता है।
वाक्य परिवर्तन / वाक्यांतरण :
वाक्य के प्रकार को दूसरे प्रकार में परिवर्तित करने को वाक्यांतरण कहते हैं। वाक्य परिवर्तन के समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वाक्य का अर्थ न बदलने पाए।
विधिसूचक से निषेधवाचक वाक्य बनाना :
वह आदमी ईमानदार है। (विधिसूचक वाक्य)
वह आदमी बेईमान नहीं है। (निषेधवाचक वाक्य)
निश्चयवाची से प्रश्नवाची तथा प्रश्नवाची से निश्चयवाची :
चाचाजी कल आएंगे। (निश्चयवाची वाक्य)
क्या चाचाजी कल आएँगे? (प्रश्नवाची वाक्य)
उसे अब क्या करना है? (प्रश्नवाची वाक्य)
उसे अब कुछ नहीं करना है। (निश्चयवाची वाक्य)
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विस्मयादिबोधक वाक्य से सामान्य वाक्य :
ओह! कितना काला! (विस्मयादिबोधक वाक्य)
वह बहुत काला है। (सामान्य वाक्य)
वाच्यान्तरण:
मैं आम नहीं खाता।
मुझसे आम नहीं खाया जाता।
संयुक्त वाक्य से सरल व मिश्र वाक्य :
लड़ाई हुई और वह मारा गया। (संयुक्त वाक्य)
वह लड़ाई में मारा गया। (सरल वाक्य)
उसने मांगा था और उसे मिल गया। (संयुक्त वाक्य)
उसने जो मांगा था, उसे मिल गया। (मिश्र वाक्य)
वाक्य-संश्लेषण:
वाक्य संश्लेषण का अर्थ है, दो या दो से अधिक वाक्यों का एक वाक्य बनाना। एक से अधिक सरल वाक्यों से सरल वाक्य, मिश्र वाक्य तथा संयुक्त वाक्य बनाए जा सकते हैं :
(क) सरल से सरल वाक्य :
राम आया। लक्ष्मण आया। भरत आया। (तीन सरल वाक्य)
राम, लक्ष्मण और भरत आए। (सरल वाक्य)
(ख) सरल से मिश्र वाक्य :
बिहार में एक गाँव था। गांव बड़ा था। वह चारों ओर से जंगल से घिरा था। जंगल घना था, उस गांव में कुछ आदिवासी रहते थे। (सरल वाक्य) बिहार में चारों ओर से घने जंगल से घिरा एक बड़ा गाँव था, जिसमें कुछ आदिवासी रहते थे। (मिश्र वाक्य)
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(ग) सरल से संयुक्त वाक्य :
घंटी बजी। छुट्टी हुई। बच्चे घर गए। (तीन सरल वाक्य)
छुट्टी होने पर घंटी बजी और बच्चे घर गए। (संयुक्त वाक्य)
वाक्यविचार शब्दार्थ :
- अभिप्रायः – आशय, मतलब।
- प्रतीक – प्रतिरूप, सूचक।
- संक्षिप्तता – संक्षिप्त करने की क्रिया।
- आज्ञार्थक – आज्ञा का सूचक।
- संकेत – इशारा, सूचक।
- आश्रित – किसी के आधार पर टिका हुआ।
- व्यवस्थित – सही जगह और कम से लगाया हुआ।
- प्रयुक्त – जिसका प्रयोग हो चुका हो।
- तालमेल – उपयुक्त और ठीक संयोग का मेल।
- क्लिष्ट – कठिन